Old Pension Scheme: राजस्थान और छत्तीसगढ़ के कर्मचारी क्या फिर से NPS में शामिल होंगे? पुरानी पेंशन पर मंडराया खतरा, जाने पूरी खबर

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जैसा की हम जानते है राजस्थान और मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ सहित 5 राज्यों में चुनाव संपन्न हो चुके है और इनके परिणाम भी आ चुके है। राजस्थान और मध्यप्रदेश जैसे दो बड़े राज्यों में भाजपा ने जीत जा झंडा लहराया है।

राजस्थान और मध्यप्रदेश सरकार के द्वारा पुरानी पेंशन को बहाल की गई थी जिस पर अब खतरा मंडराने लगा है। देश में केंद्र सरकार ने पुरानी पेंशन को लेकर अपनी स्पष्ट मंशा पहले ही जारी कर दी गई थी।

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इस पुरानी पेंशन स्कीम से संबंधित खुद प्रधानमंत्री ने अपनी राय स्पष्ट कर दी है। अब देश में किसी भी हाल में पुरानी पेंशन स्कीम को लागू नहीं किया जाएगा। अब देश में सरकारी कर्मियों को NPS से ही लाभ दिया जाएगा।

इसके लिए NPS के नियमो में कुछ बदलाव भी किए जाएंगे। नई पेंशन स्किम में काफी सुधार भी किए जाएंगे इसीलिए इसके लिए कमेटी का गठन भी किया गया है। कमेटी NPS के नियमो में बदलाव करेगी और इसे लागू करेगी।

पुरानी पेंशन के सबंध में नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (NMOPS) के अध्यक्ष विजय कुमार बंधू ने कहा की ये संभावना नहीं बल्कि यह तय समझे की राजस्थान और छत्तीसगढ़ में अब पुरानी पेंशन व्यवस्था समाप्त हो सकती है। इस संबंध में NMOPS की कार्यकारिणी की बैठक में विचार किया जाएगा।

OPS एक बड़ा मुद्दा रहा है

राजस्थान और मध्य्प्रदेश में भाजपा ने कांग्रेस को मात दी है। राजस्थान सहित अन्य राज्यों के चुनावी में OPS भी प्रभावी रहा है। अगर हम राजस्थान के पोस्टल बैलेट को देखे तो इनमे 170 से भी अधिक सीटों पर कांग्रेस पार्टी आगे रही है। इसी प्रकार से अब मध्यप्रदेश में भी विश्लेषण किया जा रहा है। हम यह भी नहीं मान सकते है की OPS ही चुनावी हार जीत का प्रमुख कारण रहा है।

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लेकिन यह जरूर मान सकते है हार जीत के समीकरणों में जो मुख्य कारण बनते है उनमे से एक OPS भी है। जैसा की हम जानते है अभी OPS को लेकर कितने मुद्दे खड़े हुए थे। राजस्थान और छत्तीसगढ़ में यदि OPS को पूरी तरह से ख़त्म कर दिया जाता है तो इसके खिलाफ सरकारी कर्मचारी आवाज उठाएंगे। इस मुद्दे को देश के हर कोने में ले जाया जा रहा है।

पुरानी पेंशन को लेकर क्या कहा गया

राजस्थान केदार के पूर्व IAS अधिकारी राजीव महर्षि जो की राजस्थान के मुख्य सचिव और केंद्रीय वित सचिव के पदों पर भी काम कर चुके है, उन्होंने पिछले साल पुरानी पेंशन को वितीय आपदा बताया था।

इस संबंद्ध में उन्होंने यह कहा की केंद्र और राज्य दोनों के लिए यह एक वित्तीय आपदा होगी। राज्यों में पहले से ही इतना कर्ज है इस स्थिति में OPS लागू होने पर अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से बर्बाद कर देगी।

CAG गिरिश चंद्र मुर्मु ने भी पुरानी पेंशन से राज्यों की वित्तीय स्थिति पर पड़ने वाले प्रभावों के जोखिमों पर संकेत दिए है। इसके सबंध में कहा की कुछ राज्यों में पुरानी पेंशन बहाल किए जाने से फिस्कल रिस्क भी बना रहेगा।

RBI और 15वें वित आयोग ने भी इस सबंध में संज्ञान लिया है। नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलुवालिया ने OPS के लिए कहा की यह सबसे बड़ी रेवड़ी है।

पीएम मोदी ने भी यही कहा है की इस सबंध में जिस रेवड़ी की बात कही है वह सही है। जहाँ एक तरफ तो राजस्व के घाटे को कम करने को लेकर बात की जाती है लेकिन खर्चो को कैसे कम करना है और इसका मेंटेन कैसे करना है इस पर कोई भी बात नहीं होती है।

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18 साल बाद रिटायर हुए कर्मी को मिली इतनी पेंशन

देश में सरकारी कर्मियों, पेंशनरों, उनके परिवारों और रिश्तेदारों को मिलाकर कुल संख्या 10 करोड़ के पार हो रही है। NPS को लेकर कर्मियों ने कहा है की अगर OPS लागू नहीं होता है तो सरकार को आने वाले लोकसभा चुनाव में नुकसान झेलना पड़ सकता है।

NPS में शामिल रहे कर्मी 18 साल बाद रिटायरमेंट हो जाते है और एक कर्मी को 2417 रुपए मासिक पेंशन मिली है, तो दूसरे को 2506 तो तीसरे को 4900 रुपए प्रति माह की पेंशन मिली है। अगर मान यह कर्मचारी पुरानी पेंशन स्किम के तहत पेंशन ले तो यह क्रमशः 5250 रुपये, 17150 रुपये और 28450 रुपये होंगे।

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